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कर्नाटक में वोटर रजिस्ट्रेशन पर अनियमितताओं के आरोप, NDA नेताओं ने CEO से की शिकायत

Kavita2
6 July 2026 1:47 PM IST
कर्नाटक में वोटर रजिस्ट्रेशन पर अनियमितताओं के आरोप, NDA नेताओं ने CEO से की शिकायत
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Karnataka कर्नाटक: वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। सोमवार को NDA नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार से मुलाकात कर फॉर्मल शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत में राज्य में चल रहे वोटर रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में “बड़ी गड़बड़ियों” और प्रक्रियागत अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री और JD(S) नेता एच. डी. कुमारस्वामी, भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी और शोभा करंदलाजे, साथ ही विधानसभा और परिषद में विपक्ष के नेता आर. अशोक और चलवाड़ी नारायणस्वामी शामिल थे। नेताओं ने CEO कार्यालय को दिए गए पत्र में कहा कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया में गंभीर खामियां सामने आ रही हैं, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।-




शिकायत में कहा गया है कि SIR प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार अधिकारी निर्धारित नियमों और प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे वोटर रजिस्ट्रेशन में त्रुटियां और अनियमितताएं हो रही हैं। नेताओं का आरोप है कि यह स्थिति लोकतंत्र की भावना को नुकसान पहुंचा रही है और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर डाल सकती है।

प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों में स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य में घर-घर जाकर (door-to-door verification) वोटर वेरिफिकेशन को अनिवार्य किया जाए, ताकि प्रत्येक मतदाता की पहचान सही तरीके से सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि जिन अधिकारियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर अनियमितताओं के आरोप हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा SIR गाइडलाइंस के अनुसार घर-घर जाकर सत्यापन नहीं किया जा रहा है। डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEO/DC) की ओर से दिए गए निर्देशों के बावजूद, प्रक्रिया में ढिलाई बरती जा रही है, जिससे वोटर लिस्ट की सटीकता प्रभावित हो रही है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वोटर रोल की शुद्धता लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव होती है, और यदि इसमें गड़बड़ियां होती हैं तो चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी कारण NDA नेताओं ने चुनाव आयोग से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से इस शिकायत को प्राप्त कर लिया गया है और मामले की जांच की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी तक इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कर्नाटक में वोटर लिस्ट को लेकर इस तरह के आरोप पहले भी लगते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला सीधे उच्च स्तर पर शिकायत तक पहुंच गया है। इससे आने वाले समय में राज्य की चुनावी राजनीति में तनाव और बढ़ सकता है।

चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि SIR जैसे अभियान का उद्देश्य वोटर लिस्ट को अपडेट और सटीक बनाना होता है, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर नियमों का पालन नहीं होता तो पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए घर-घर जाकर सत्यापन को एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

इस पूरे मामले ने राज्य में चुनावी पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर नई बहस शुरू कर दी है। विपक्ष का कहना है कि वोटर लिस्ट की सटीकता सुनिश्चित करना लोकतंत्र की सबसे बुनियादी जरूरत है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया की जांच जरूरी है।

कुल मिलाकर, NDA नेताओं की यह शिकायत कर्नाटक में वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को लेकर एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप लेती दिख रही है। आने वाले दिनों में इस पर चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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